Earthing kya hai | अर्थिंग के प्रकार और earthing kese ki jati hai



Earthing kya hai | अर्थिंग क्या है | Earthing के प्रकार :- Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad aap acche se samajh jayenge ki Earthing kya hai | what is earthing in hindi 

दोस्तो आपने सुना होगा की ये wire ground का है या ये wire earthing का है। और ज़्यादातर लोग ground और earthing को एक ही मानते है। लेकिन ऐसा नहीं है।

Earthing kya hai
Earthing kya hai


grounding और Earthing मे बहुत अंतर है। आज इस post मे हम grounding और earthing पर बात करेंगे और साथ ही साथ ये भी जानेंगे की इन्हे केसे इस्तेमाल किया जाता है, और Earthing kya hai


Motor kya hai और कितने प्रकार की होती हैं |types of motors in hindi

Hello दोस्तों आज हम बात करेंगे electric motor के बारे में की Motor kya hai  और कितने प्रकार की होती हैं, और साथ ही साथ ये भी जानेंगे की motor कैसे काम करती है, पूरी जानकारी के लिए आर्टिक्ल को अंत तक जरूर पढ़ें। 

Motor kya hai और कितने प्रकार की होती हैं


MOTOR kya hai (What is Motor)

Motor एक electro-mechanical machine है जो electrical एनर्जी को mechanical एनर्जी में convert करती है।

motor को भौतिक रूप से समझाने के लिए, प्रसिद्ध "फ्लेमिंग के बाएं हाथ का नियम" एक अच्छा तरीका है, जब दो चुम्बकों के एक दूसरे के विपरीत रखे हो तो, यह बल उत्पन्न करता है।

जब विद्युत तार से विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो यह चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। चुंबकीय क्षेत्र चुंबक से चुंबकीय क्षेत्र को आकर्षित या पीछे हटाता है, जिस से विद्युत तार को स्थानांतरित करने के लिए बल उत्पन्न करता है। और रोटर घूमने लगता है। जिसे हम roateting energy या mechenical energy कहते है।

Types of Motor in hindi(motor कितने प्रकार की होती हैं?)

Electrical Motor का कार्य सिद्धांत मुख्य रूप से magnetic और electrical क्षेत्र की परस्पर क्रिया पर निर्भर करता है, electrical motor मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है, AC Motor और DC Motor
एसी motor alternating current से चलती है और DC Motor direct current से चलती है। लेकिन अब Special motor भी आने लगी है जिसके बारे में हम आगे जानेंगे ।

Motor 3 प्रकार की होती है।

  • AC Motor (एसी motor)
  • DC Motor (डीसी motor)
  • Special Motor (स्पेशल motor)

चलिये अब हम इन सभी प्रकार की motor के बारे में समझते है।

एसी motor(AC Motor)

जैसा की हम सब जानते है AC Motor AC (alternating current) से चलती है। 

AC Motor
 

Types of AC Motor (AC motor के प्रकार)

AC motor दो प्रकार की होती है ।

    • सिंक्रोनस motor (synchronous motor)
    • असिंक्रोनस motor (asynchronous motor)

      सिंक्रोनस motor (synchronous motor)

      वह motor है जो electrical energy को mechanical energy मे convert करता है, और synchronous speed से चलता है, सिंक्रोनस motor (synchronous motor) के रूप में जानी जाती है।

      Working Principle of a Synchronous Motor

      जब सिंक्रोनस motor को Supply दी जाती है, तो एक revolving field स्थापित किया जाता है। यह क्षेत्र रोटर को अपने साथ खींचने की कोशिश करता है, लेकिन रोटर inertia के कारण ऐसा नहीं कर सका। इसलिए, कोई starting torque उत्पन्न नहीं होता है। इसलिए सिंक्रोनस motor एक सेल्फ starting motor नहीं है।

      असिंक्रोनस motor (asynchronous motor)

      असिंक्रोनस motor (asynchronous motor) को induction motor भी कहा जाता है ।

      Electromagnetic induction phenomenon का उपयोग करके electrical energy को Mechanical energy में परिवर्तित करती है। asynchronous motor कहलाती है। जिसे induction motor भी कहा जाता है।

      induction motor मुख्य 2 प्रकार होते है।

        • Single phase induction Motor (सिंगल फ़ेस इंडक्शन motor )
        • Three phase induction Motor (थ्री फ़ेस इंडक्शन motor )

          Single phase induction Motor(सिंगल फ़ेस इंडक्शन motor )

          Single Phase induction Motor Single Phase Power Supply पर कार्य करती है। क्यों की छोटे कार्य के लिए अधिकांश रूप से Single Phase induction motor का प्रयोग किया जाता है क्योकि सिंगल फेज motor का Size छोटा होता है।

          थ्री फेज motor के स्टेटर तथा रोटर दोनों में अलग अलग winding की जाती है। जबकि सिंगल फेज motor में केवल स्टेटर में ही winding की जाती है इसमें रोटर पर winding नहीं की जाती है।

          Three phase induction Motor (थ्री फ़ेस इंडक्शन motor )

          Three Phase induction Motor Three Phase Power Supply पर कार्य करती है, ज्यादातर industries में मशीनों को चलाने के लिए Three Phase induction Motor का ही प्रयोग किया जाता है। 

          Three Phase induction Motor 2 type ki hoti hai.

            • Squirrel Cage Induction Motor (स्कूइररेल केज इंडक्शन motor )
            • Slip Ring Induction Motor ( स्लिपरिंग इंडक्शन motor )

              Squirrel Cage Induction Motor (स्कूइररेल केज इंडक्शन motor )

              यह सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली motor है ज्यादातर industries में squirrel cage induction motor का ही use किया जाता है।

              Slip Ring Induction Motor ( स्लिपरिंग इंडक्शन motor )

              Slip ring induction motor heavy torque के लिए प्रयोग की जाती है।

              इसका उपयोग अधिकतर heavy weight lifting machine में किया जाता है। जैसे elevator, lift, Excavators etc.

              ये motor इन सब में इसलिए प्रयोग की जाती है क्यों की इस motor के रोटर में स्लीपरिंग लगी होती है। जिसकी मदद से हम इस motor की स्पीड बहुत ही आराम control कर सकते है।

              DC Motor(डीसी motor)

              एक डीसी motor Direct current (DC supply ) से चलाई जाती है आज के समय में इंजीनियरिंग से लेकर प्रोध्योगिकी के क्षेत्र में हर जगह DC motor का प्रयोग किया जाता है, electric shaver से लेकर automobile तक - डीसी motor हर जगह प्रयोग की जाती हैं।

              DC Motor
               

              Types of DC Motor(DC motor कितने प्रकार की होती है?)

                • DC shunt Motors (DC शंट motor)
                • DC series Motors (DC सीरीज motor)
                • DC compound motors (DC कंपाउंड motor)
                • DC permanent magnet motors (परमानेन्ट मैगनेट motor)

                  DC Shunt Motor (डीसी शंट motor)

                  DC Shunt Motor सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली motor है। क्योंकि यह motor (constant speed motor है।

                  DC series Motor(डीसी सीरीज motor)

                  DC series Motor Hi starting torque motor है। इसलिए इस motor को हम बिना लोड के स्टार्ट नही कर सकते है।

                  DC compound motors (DC कंपाउंड motor)

                  DC कंपाउंड motor DC Series motor and DC shunt motors से मिलकर बनती है इस motor का उपयोग बहुत कम जगह होता है।

                  DC permanent magnet motors (परमानेन्ट मैगनेट motor)

                  इस motor मे परमानेन्ट मैगनेट का उपयोग करते है। इसके रोटर में winding की जाती है और power supply भी rotor में ही दी जाती है।

                  उपयोग – कंप्यूटर फैन, टॉय कार, ड्रोन

                  अगर आपको blogging में रुचि है तो आप इस article को पढ़ सकते है 

                  Conclusion

                  दोस्तों आज post में हमने motor के बारे में जाना। में आशा करता हूँ, आप लोगों को Motor kya hai और कितने प्रकार की होती हैं |types of motors in hindi के बारे में समझ आ गया होगा। उम्मीद करता हूँ आपको ये पोस्ट जरूर अच्छी लगी होगी। अगर ये पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ निचे दिए गए social media handle button से ज़रूर share करे। दोस्तों हमारे द्वारा दी गयी जानकारी में हमसे कोई भी कमी हुई हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में Motor kya hai इस पोस्ट के बारे कमेंट में जरूर बताये की आपको ये दी गई जानकारी कैसी लगी धन्यवाद।

                  Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai ( एयर कंडीशनर क्या है और कैसे काम करता है। )

                   Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai in hindi Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad
                  aap acche se samajh jayenge ki Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai in hindi

                  Dosto हम सब को गर्मी के मौसम में Air Conditioner की ठंडी ठंडी हवा लेना हम सबको बहुत पसंद है। लेकिन क्या आप को पता है Air Conditioner कैसे काम करता है। कैसे ज्यादा गर्मी में भी ठंडी हवा देता है। अगर आप सोच रहे है की जैसे cooler काम करता है। वैसे Air Conditioner भी काम करता होगा तो यह बिलकुल गलत है।
                  Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai. जहाँ Air Conditioner लगा होता है। वो वहां की गर्म हवा को इकठ्ठा करके उसे Air Conditioner की Refrigerant और Coils के द्वारा हवा को ठंडा करके हवा को बाहर निकालता है। जिससे की उस जगह की गर्म हवा ठंडी हवा में बदल जाती है। जिस से वह का Temperature कम हो जाता है।
                  अब तो दोस्तों सर्दी आने वाली है। अगर आप अगली गर्मियों में Air Conditioner लेने का सोच रहे है तो Air Conditioner के क्या फायदे होते है। क्या नुकसान होते है इसके बारे में भी जानकारी करना जरुरी है। में आपको इसके बारे में पूरी जानकारी देने की कोशिश करुंगा। Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai
                  Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai in hindi in sab ke bare me ham bat karenge.


                    Air Conditioner ka itihas

                    Willis Haviland Carrier (Photo Credit :wikipedia)
                    1902 में Air Conditioner का आविष्कार Willis Haviland Carrier ने किया था। उन्होंने ब्रुकलिन शहर की सैकेट-विल्हेम्स लिथोग्राफिंग एंड पब्लिशिंग कंपनी के लिए Air Conditioner का आविष्कार  हुआ था। उस Company में नमी की समस्या को हल करने के लिए।
                    First Air Conditioner (Photo credit: smithsonianmag)
                    ताकि पेपर नमी से खराब न हो इसलिए Mr Willis Haviland Carrier ने इस आधुनिक मशीन का निर्माण किया। जिसे हम सब Air Conditioner कहते है।

                    Air Conditioner kya hai aur working principle

                    अब हम यहाँ समझते है की Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai और इसका working principle kya hai 
                    जब आप एक Air conditioner on करते है और एक Temperature सेट करते है। जैसे की आपने सेट किया 22 डिग्री सेल्सियस। 

                     
                    Air Conditioner kya hai aur working principle
                    Air Conditioner kya hai aur working principle (Photo credit: science abc)

                     तब Air conditioner में set thermostat Active हो जाता है। और समझ जाता है की आपके द्वारा सेट किया गया Temperature room Temperature से अलग है। tab Indore यूनिट room की Hot air को अपनी तरफ खींचता है। फिर वो गर्म हवा indoor unit में लगे उस tubes पर बहती है, जिनमे refrigerant घूम रहा है।
                    Refrigerant heat को absorb करके Hot gas बना देता है। जो evaporator coils पर गिरती है evaporator coils सिर्फ गर्मी absorb नहीं करता वो hot air में से humidity भी अलग करता है। और फिर ये hot REFRIGERANT gas Compressor से pass होती है जो इस हॉट gas को compresses करके इसका temperature और ज्यादा बड़ा देता है।
                    फिर ये Hot gas condenser में travel करती है। फिर ये Condenser इस gas को Condense करके लिक्विड में बदल देता है।
                    जब गैस condenser से आगे जाती है। तो cooler पर लगी fins के कारण ठंडी हो जाती है।
                    फिर ये refrigerant gas जो अब ठंडी हो चुकी है expansion valve के threw flow होती है (expansion valve evaporator में liquid refrigerant के flow को control करता है।)
                    यही क्रिया बार बार होती है जब तक room ki garam हवा ठंडी न हो जाये।
                    और room ka temperature aapke द्वारा set की गई Temperature value tak न पहुंच जाये।
                    जो आपसे सेट की थी AC on करने पर 22 डिग्री सेल्सियस।

                    अब आप समझ गए होंगे Air Conditioner kya hai aur iska working principle kya hai 

                    Air Conditioner kya hai aur iske parts

                    सभी प्रकार के Air Conditioner में ये Main Parts होते है।
                    • Evaporator
                    • Compressor
                    • Condenser
                    • Expansion valve
                    • Evaporator

                    Evaporator

                    Evaporator को heat ex changer coil भी कहते है। ये refrigerant gas द्वारा room की गर्मी को collect करता है। और उसमे से Heat को absorbs करके gas में बदल देता है।
                    अब आप समझ गए होंगे Evaporator kya hai aur Air Conditioner kya hai

                    Compressor

                    जैसा कि नाम से स्पष्ट है compress ये refrigerant gas ko compress करने का काम करता है।
                    Air Conditioner Compressor
                    Air Conditioner Compressor (Photo Credit :wikipedia)

                     

                    जिससे गैस का temperature बड्ड जाता है। Split AC में compresses out door unit में लगा होता है।अब आप समझ गए होंगे Compresser kya hai aur Air Conditioner kya hai 

                    Condenser

                    compressor से निकली vaporized refrigerant condenser में आता है। और ये vaporized refrigerant को lequid में बदल देता है। ये भी outdoor unit में लगा होता है। 
                    Air Conditioner condenser
                    Air Conditioner condenser (Photo Credit: energyconversiondevices)



                    अब आप समझ गए होंगे Condenser kya hai aur Air Conditioner kya hai

                    expansion valve 

                    expansion valve evaporator और condenser के बीच लगा होता है। condenser से evaporator में आने वाली refrigerant को control करता है।
                    ये AC के main Parts में  से एक है
                    jiske द्वारा AC गर्म हवा को ठंडी हवा में बदल देता है। 
                    अब आप समझ गए होंगे expansion valve kya hai aur Air Conditioner kya hai

                    AC Me Kaun Si Gas Hoti Hai

                    ज्यादतर AC में में 2 type की गैस mostly use होती है।
                    • hydrofluorocarbons or HFCs
                    • hydrochlorofluorocarbons or HCFCs
                    आप आपने ये जान लिया है Air Conditioner kya hai अब बात करते है

                    AC Ka Bill Kitna Ata Hai

                    AC में clectricity consuption AC के Stars पर dipend है मार्किट में
                    • 5 star
                    • 3 star 
                    • 2 star तक के AC आते है
                    जितना ज्यादा star का Air Conditioner आप ख़रीदेंगे उतना electricity consuption kam hoga 

                    Air Conditioner kitne prakar ke hote hai 

                    mainly 2 Type के AC होते है।
                    • Split AC
                    • Window AC

                    Split AC|Split Air Conditioner

                    Ab me bataunga ki इस प्रकार की Air Conditioner वर्तमान में काफी लोकप्रिय है। इस AC के दो अलग अलग भाग होते है। एक भाग घर के बाहर लगता है जबकि दूसरा भाग कमरे के अंदर रहता है।इस प्रकार की AC में विंडो की जरूरत नही होती है। Split AC तुरन्त कूलिंग नही करते है। इन्हें कूलिंग में करने में समय लगता है। आज कल Split AC का चलन बहुत है क्यों की ये आवाज नहीं करते।
                    और इसको किसी भी दीवार पर आसानी से लगाया जा सकता है। इसमें 2 unit होती है।
                    1. indoor unit
                    2. out door unit

                    इसकी cooling efficiancy window AC के mukaable thodi कम होती है।

                    Window AC

                    Window AC आज कल इनका use कम हो गया है। इसमें split Ac की तरह २ यूनिट नहीं होती।Air Conditioner kya hai
                    ये पूरा AC एक ही लोहे के बॉक्स में फिट होता है। jise Window में लगाए जाता है। जिस room में window नहीं होती। वहा पर Window ac नहीं लग सकता। ये चलते वक़्त आवाज करता है लेकिन ये on होते ही cooling सुरु कर देता है।
                    Dosto आज कल market में invertor AC भी आते है जिनमे Electricity consuption बहुत कम होता है।अब आप समझ गए होंगे Air Conditioner kya hai aur kitne prakaar ka hota hai

                    Air Conditioner kya hai aur Air Conditioner ka chunav kese kare
                    Ac ka chunav kese kare ye bahut badi samasya hai क्या आपको पता है AC टन के हिसाब से खरीदना पड़ता है। जैसे 1 tan 1.5 tan, 2 Tan, 2.5Tan, 3 tan
                    अब आप सोच रहे होंगे Tan तो weight से calculate होता है। लेकिन AC में Tan का मतलब उसकी cooling capacity से होता है। अगर हम simple बात करे तो 1tan का AC 1tan बर्फ के बराबर कूलिंग करता है। मतलब 1 रूम में 1tan बर्फ राख दी जाये तो वो barf जितना ठंडा करेगी वही 1 tan AC की capacity होती है।
                    अब हम बात करते है

                    Ac tan calculation

                    1 X 1 के room को Cool करने के लिए 1 घंटे में 20 BTU खर्च होता है।Air Conditioner kya hota
                    12 हज़ार BTU = 1 Tan
                    अब अगर आपका room
                    9 x 9 से 11 x 11 का room है तो आपको 1 tan का AC required होगा।
                    और अगर room 11 x 11 से 14 X 14 का है तो 1.5 tan required होगा।
                    और अगर room 14 x 14 से 18 X 18 का है तो 2 tan required होगा।

                    ab aap acche se samajh gaye honge Air Conditioner kya hai. lekin ab baat karte hai

                     AC ke faayde aur nuksaan

                    1. Air Conditioner आपको बिना किसी शोर-शराबे के बिना किसी आवाज के Room को ठंडा कर देती यही जिस से हमको आराम मिलता है। लेकिन ज्यादा AC में रहने से आप का शरीर खराब हो सकता है। जैसे की इससे त्वचा की नमी कम हो जाती है। तथा त्वचा रुखी हो जाती है। श्वसन संबंधी समस्याओं का बढ़ना, मोटापा आदि बड़ जाता है।
                    2. AC से आपको Fresh Oxygen के साथ ठंडी हवा मिलती है। लेकिन Air Conditioner से बाहर निकलते है तो आपको बुखार भी आ सकता है।
                    3. कुछ जगह भोजन खराब होने को कम करने के लिए AC का उपयोग किया जाता है। Lekin ज्यादा समय तक भोजन AC में रखने से भी खराब हो जाता है।
                    4. Air Conditioner होने से आपको बहुत आराम तो है लेकिन AC में electricity consuption bahut होता है। जिसका हमको बहुत ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।Air Conditioner kya hai

                    Conclusion

                    दोस्तों आज post में हमने solar panel के बारे में जाना। में आशा करता हूँ, आप लोगों को Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai के बारे में समझ आ गया होगा।
                    उम्मीद करता हूँ आपको ये पोस्ट जरूर अच्छी लगी होगी। अगर ये पोस्ट आपको अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ निचे दिए गए social media handle button से ज़रूर share करे।
                    दोस्तों हमारे द्वारा दी गयी पोस्ट में हमसे कोई भी कमी हुई हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमे comment करके ज़रूर बताये और ये भी बताये की आपको
                    Air Conditioner kya hai aur kese kaam karta hai के बारे में दी गई जानकारी कैसी लगी धन्यवाद।


                    solar panel kya hai | सोलर पैनल क्या है | aur kese kaam karta hai

                     

                      Solar panel kya hota hai Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad aap acche se samajh jayenge ki Solar panel kya hota hai. Solar panel बहुत सरे cells से मिलकर बनता है ये सूर्य की रौशनी को Electricity ने बदलने का काम करता है आज बहुत सी जगह पर इन सोलर पैनल का प्रयोग किया जा रहा है। अब तो भारत सरकार भी solar plants लगाने जा रही है जिससे कम खर्चे में बिजली मिल सकती है और पर्यावरण भी प्रदूषण मुक्त होगा।


                    Relay kya hoti hai aur kese kaam karti hai aur prakaar

                    relay kya hoti hai aur kese kaam karti hai Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad aap acche se samajh jayenge ki relay kya hoti hai 
                    Relay एक स्विच की तरह काम करता है। जिसका काम Electronic and electromechanic के रूप में Circuit को on off करना होता है
                    relay kya hoti hai aur kese kaam karti hai
                    Relay kya hoti hai aur kese kaam karti hai

                    mcb kya hoti hai kaise kaam karti hai - MCB क्या होती है कैसे काम करती है।

                     

                    mcb kya hoti hai kaise kaam karti hai, Full form, uske prakaar,MCCB :- Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad aap acche se samajh jayenge ki mcb kya hoti hai kaise kaam karti

                    इसका मतलब ये है की जब MCB (Miniature Circuit Breaker) किसी सर्किट से जुडी होती है तो जब सर्किट में जाने वाली लाइट MCB (Miniature Circuit Breaker) की सेट वैल्यू से ज्यादा हो तो MCB (Miniature Circuit Breaker) अपने आप बंद हो जाती है। Chaliye ab ham vistaar se jaante hai ki MCB kya hoti hai kaise kaam kartihai.

                     

                    mcb kya hoti hai kaise kaam karti hai
                    Mcb kya hoti hai kaise kaam karti hai

                      capacitor kya hota hai and types | कपैसिटर क्या होता है ? उसका कार्य और प्रकार

                      Capacitor kya hota hai and types:Hello dosto aaj main aapke liye bahut acchi jaankari lekar aaya hu jisse padne ke baad aap acche se samajh jayenge ki capacitor kya hota hai kese kaam karta hai aur kitne prakaar ke hote hai.
                      Capacitor एक इलेक्ट्रिक स्टोरेज डिवाइस के रूप में कार्य करता है।

                      Capacitor को कुछ लोग “Condenser” भी कहते है।


                        Capacitor kya hota hai and types:-

                        कैपेसिटर में दो Conductor Plates होती है जिनके दोनों के बीच डाई Insulator Material लगाया जाता है जिससे यह प्लेट अलग हो जाती है। जिसमें से एक प्लेट पर पॉजिटिव चार्ज होता है। और दूसरी पर नेगेटिव चार्ज होता है। दोनों Conductors को metal की पतली rod से जोड़ा जाता है।
                        Capacitor kya hota hai and types | कपैसिटर क्या होता है ? उसका कार्य और प्रकार
                        capacitor kya hota hai and types | कपैसिटर क्या होता है ? उसका कार्य और प्रकार
                        जब कैपेसिटर को किसी Power source के साथ में जोड़ दिया जाता है। और इसमें इन् दो प्लेटो के माध्यम से इलेक्ट्रिसिटी स्टोर हो जाती है। और यह इलेक्ट्रिसिटी आवश्यकता होने पर स्टोर इलेक्ट्रिसिटी को Use भी किया जा सकता है। आशा करता हु आप समझ गए होंगे Capacitor kya hota hai and types इमेज के कपैसिटर का Symble दिया गया है।

                        Symble of capacitor
                        Symble of capacitor


                        कैपेसिटेंस को मापने की इकाई Farad (F) है।

                        Capacitor ki capacitance- कपैसिटर की कपसिटेन्स क्या होती है।:-


                        कैपेसिटेंस एक कपैसिटर की इलेक्ट्रिक चार्ज की क्षमता का माप है। जिस को फैराडे में मापा जाता है। ( ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी माइकल फैराडे के नाम पर फैराड (एफ को संक्षिप्त) किया जा रहा है। ) कपैसिटर की दो प्लेटों के बीच का Ratio (Capacitance) कहलाता है। कैपेसिटर में One Farad की Capacitance होती है। जब One Colam का Electric charge प्लेटों पर One Volte के द्वारा दिया जाता है।

                        Capacitance को “C” से Denote किया जाता है। C हमेशा positive होता है और इसकी कोई negetive इकाई नहीं होती है।
                        आप पढ़ रहे है capacitor kya hota hai and types
                        उदाहरण के लिए, फैराड का उपयोग आमतौर पर Micro farad, Neno farad और pico farad के रूप में किया जाता है।

                        Capacitance ka formula कुछ इस प्रकार है


                        C = Q/V

                        C – कैपेसिटर की धारिता जिसका मात्रक F होता है।
                        Q – विद्युत आवेश जिसको कुलाम में मापा जाता है।
                        V – विभवांतर या Voltage, दो प्लेटो के मध्य का Potential Difference


                        Must read: TRANSFORMER IN HINDI | What is TRANSFORMER | TRANSFORMER क्या है

                        Capacitor ki banawat - कैपेसिटर की बनावट :-

                        कैपेसिटर में दो Conductor Plates होती है। जिनके बीच समानांतर दूरी रखी जाती है। जिनके दोनों के बीच डाई Insulator material लगाया जाता है। जिससे यह प्लेट अलग हो जाती है। प्लेट्स बेलनाकार, गोलाकार इत्यादि आकार में होती है। जिसमें से एक प्लेट पर पॉजिटिव चार्ज होता है। और दूसरी पर नेगेटिव चार्ज होता है।

                        Capacitor ki banawat-कैपेसिटर की बनावट
                        Capacitor ki banawat-कैपेसिटर की बनावट


                        Capacitor ke prakaar-कैपेसिटर के प्रकार:-

                        1. Fixed Capacitor
                        2. Variable Capacitor
                        3. Polarized Capacitor
                        4. Non Polarized Capacitor

                         
                        Capacitor ke prakaar-कैपेसिटर के प्रकार
                        Capacitor ke prakaar-कैपेसिटर के प्रकार


                        Fixed Capacitor - ( फिक्स्ड कैपेसिटर ) :-

                        इस प्रकार के capacitor में electric charge storage capacity फिक्स होती है। इसको घटा और बढ़ा नही सकते है।
                        फिक्स्ड कैपेसिटर पांच प्रकार के होते हैं।



                        1. Paper Capacitors
                        2. Plastic Capacitors
                        3. Ceramic Capacitors
                        4. Mica Capacitors
                        5. Electrolytic Capacitors



                        Variable Capacitors - ( वेरिएबल कपैसिटर ):-

                        इस प्रकार के कैपेसिटर का Electric Charge का मान घटाया और बढ़ाया जा सकता है। इसका मान हम physically या electrically moves के द्वारा घटा बढ़ा सकते है।
                        ये चार प्रकार के होते है।
                        1. Tuning
                        2. Trimmer
                        3. Mechanical
                        4. Electronic

                        Polarized Capacitor - ( पोलरीज़ेड कपैसिटर ):-

                        इस प्रकार के कैपेसिटर में Positive और Negative दोनों प्रकार के टर्मिनल होते है। Capacitor का Use करने से पहले पॉजिटिव और नेगेटिव points का ध्यान रखना जरुरी है।

                        Non Polarized Capacitor - ( नॉन पोलरीज़ेड कपैसिटर ):-

                        इस प्रकार के कैपेसिटर में Positive और Negative टर्मिनल नही होते है। electrical circuit में इसे कैसे भी लगा सकते है।

                        अब तक आपने पढा capacitor kya hota hai and types अब हम ये जानते है की ये कहा use होते है|

                        कैमरा के Flash Light में भी Capacitor का उपयोग होता है।
                        Capacitors का इस्तमाल charge को store करने के लिए होता है।
                        Capacitor DC सप्लाई को block कर सकते हैं. और यह AC सप्लाई को Flow करता है इसलिए Capacitor का इस्तेमाल AC और DC दोनों प्रकार के करंट में किया जाता है।
                        ज्यादातर सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कैपेसिटर का उपयोग होता है।
                        पंखे में भी Capacitor लगा होता है। जो पंखे की स्पीड बढ़ाता है।

                        Conclusion :-

                        दोस्तों आज post में हमने Capacitor के बारे में जाना में आशा करता हूँ। आप लोगों को capacitor kya hota hai and types के बारे में समझ आ गया होगा। अगर आपको ये जानना है की कपैसिटर को कैसे चेक करते है तो आप हमें कमेंट कीजिये में जरूर आपको बताने की कोशिश करूँगा।
                        उम्मीद करता हूँ आपको ये पोस्ट ज़रूरअच्छी लगी होगी। अगर ये पोस्टआपको अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ निचे दिए गए social media handle button से ज़रूर share करे।

                        दोस्तों हमारे द्वारा दी गयी पोस्ट में हमसे कोई भी कमी हुई हो तो निचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमे comment करके ज़रूर बताये और ये भी बताये की आपको capacitor kya hota hai and types के बारे में दी गई जानकारी कैसी लगी धन्यवाद।

                        TRANSFORMER IN HINDI | What is TRANSFORMER | TRANSFORMER क्या है

                        TRANSFORMER IN HINDI | What is TRANSFORMER | TRANSFORMER क्या है। 
                        एक ट्रांसफार्मर को एक ऐसे उपकरण के रूप में परिभाषित किया गया है जो electromagnetic induction की प्रक्रिया के माध्यम से electrical energy को एक सर्किट से दूसरे में transfer करता है। इसका उपयोग सर्किट के बीच voltage के स्तर को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
                        TRANSFORMER IN HINDI | What is TRANSFORMER | TRANSFORMER क्या है।
                        What is Transformer


                        माइकल फैराडे ने 1831 मे Induction के सिद्धांत की खोज की और Wire और कॉइल के बीच Induction के साथ पहला प्रयोग किया।
                        ट्रांसफार्मर: उपयोग कोई Device 12 Volt पर चलती है तब ट्रांसफार्मर हमारे घर में आने वाली Electricity जिसका वोल्टेज 220 volt होता है उसे कम करके 12 volt कर देता है।

                        ट्रांसफार्मर का सिर्फ एक ही काम होता है बिजली को कम या फिर ज्यादा करना तो आज की इस पोस्ट में हम आपको What is transformer in hindi बारे में पूरी जानकारी देने वाले हैं।

                          Transformer का कार्य सिद्धांत (Principle of Transformer) 

                           

                          फैराडे के Electromagnetic induction के नियम के अनुसार, यदि Secondary winding का सर्किट बंद हो जाता है, तो इसके माध्यम से एक धारा प्रवाहित होगी। यह एक ट्रांसफार्मर का मूल कार्य सिद्धांत है। एक ट्रांसफार्मर जो Primary Winding से Secondary Winding के बीच वोल्टेज को बढ़ाता है, एक Step-up Transformer के रूप में परिभाषित किया गया है। इसके विपरीत, एक ट्रांसफॉर्मर जो Primary Winding to Secondary Windin के बीच वोल्टेज को कम करता है, Step-down Transformer ट्रांसफार्मर के रूप में परिभाषित किया जाता है। जब Primary Winding में Current flow किया जाता है। तो उसके चारो तरफ एक मैगनेटिक फील्ड बन जाता है जिसको Electromotive Force कहते है। जब दूसरी Coil इस मैग्नेटिक फील्ड के अंदर आती है तो दूसरी Coil में Electrons बहने लगते हैं Magnetic field कहते है।


                          ट्रांसफार्मर में Use होने वाले कुछ Basic Parts (Main Parts of Transformer)


                          • कोर (Core)

                          transformer Core
                          Transformer Core
                          यह ट्रांसफार्मर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कोर कई आकृतियों और आकारों में आ सकते हैं। यह कोर का चुंबकीय गुण है Core के चारों ओर Winding लिपटी होती है।

                          • कुण्डलन (Winding)

                          तांबे का तार जो तारों के फेरे होते है उसे winding कहते है। ट्रांसफार्मर में दो winding होती है एक primary winding और दूसरी secondary winding ये सभी insulated layer से एक दुसरे से contact में रहती है। ठोस तांबे के तार का आमतौर पर उपयोग किया जाता है।

                          Transformer Winding
                          Transformer Winding

                          • Conservator tank

                          Conservator tank high power ट्रांसफार्मर में use होते है। ऐसे ट्रांसफार्मर गली मोहल्लो में ये आप ने जरूर देखे होंगें ये Conservator tank ट्रांसफार्मर में ऊपर की होते है। इसमें तेल ठंडा होता है।
                          Transformer Conservator tank
                          Transformer Conservator tank

                          • ब्रीदर (Breather)

                          यह ट्रांसफार्मर को साँस लेने के काम आता है। ट्रांसफार्मर के अंदर की हवा बाहर और बाहर की हवा अंदर Breather के thrue होती है। जब आयल  में घूमता है तो घूमने के लिए हवा की जरुरत होती है तो यही Breather हवा को बाहर निकालने और अंदर लेने में मदद करता है।
                          Transformer Breather
                          Transformer Breather

                          • टैंक (Tank)

                          Steel tank ट्रांसफार्मर का मैं पार्ट होता है core,या वाइंडिंग. सब कुछ इसी के अन्दर होता है oil में डूबा रहता यही आयल कोर या वाइंडिंग को ठंडा करता है।
                          Transformer Tank
                          Transformer Tank

                          • कूलिंग ट्यूब (Cooling Tube)

                          जिस तरह गाड़ियों में रेडिएटर होता है जो कूलेंट को ठंडा करता है उसी प्रकार ट्रांसफार्मर में Cooling तुबे होते है जो इसको ठंडा करते है हम इससे एक तरह से ट्रांसफॉर्मर का रेडियेटर भी बोल सकते है। 
                          Transformer Cooling Tube
                          Transformer Cooling Tube

                          Transformer कितने प्रकार का होता है ?

                          वोल्टेज के आधार पर ट्रांसफार्मर के प्रकार 

                          वोल्टेज के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते है


                          1. Step-up transformer   2.  Step-down transformer
                           
                          स्टेप अप ट्रांसफार्मर और स्टेप डाउन ट्रांसफार्मर जो वोल्टेज लेबल को घटाते या बढ़ाते है इन दोनों के बारे में इस page पर detail में समझते है।
                          • Step-up transformer

                          ऐसा Transformer जो की Voltage को बढाता है Primary windings से Secondary windings के बीच में उसे एक Step-up transformer कहा जाता है. इसमें Primary winding में wire के turn कम होते है और Secondary Winding में Wire के फेरे ज्यादा होते है।
                           
                          Step-up transformer

                          Step-up transformer

                          • Step-down transformer

                          वहीं एक ऐसा Transformer जो की Voltage को घटाता है Primary Windings से Secondary Windings के बीच में उसे एक Step-down transformer कहा जाता है. इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा किया जाता है इसकी primary winding में wire पतला और wire के फेरे ज्यादा होते है और Secondary winding में wire के फेरों की सख्या कम होती है
                          Step-down transformer
                                           Step-down transformer

                          Supply के आधार पर ट्रांसफार्मर के प्रकार

                          फेज(Supply) के आधार पर ट्रांसफार्मर दो प्रकार के होते हैं

                          1. सिंगल फेज ट्रांसफॉर्मर (Single phase transformer)
                          2. थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर  (Three phase transformer)
                            सिंगल फेज ट्रांसफॉर्मर और थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर  इन दोनों के बारे में इस page पर detail में समझते है। 
                            • सिंगल फेज ट्रांसफॉर्मर (Single phase transformer)

                            इन single-phase power supply की में single wire को circuit के साथ connect होना होता है. इस single phase का voltage होता है 220V.
                            यह ट्रांसफार्मर सिंगल फेज की वोल्टेज को कम या ज्यादा करता है उसे सिंगल फेज ट्रांसफार्मर कहते हैं इसमें दो वाइंडिंग होती है प्राथमिक वाइंडिंग में सिंगल फेज विद्युत सप्लाई दी जाती है और द्वितीयक वाइंडिंग में सिंगल फेज विद्युत सप्लाई स्टेप डाउन या स्टेप अप के रूप में ली जाती है.
                              
                            • थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर  (Three phase transformer)

                            वहीँ three phase में 3-wires की जरुरत होती है. इन three phase की voltage होती है इसमें तीन primary winding तथा तीन Secondary winding होती है यह सेल या कोर टाइप के होते हैं
                            आजकल थ्री फेज ट्रांसफार्मर का ही अधिक प्रयोग होता है.

                            Usage के आधार पर ट्रांसफार्मर के प्रकार

                            1. Power Transformer

                            2. Distribution Transformer

                            3. Measurement Transformer

                            4. Protection Transformers

                            Conclusion:

                            दोस्तों आज Post में हमने Transformer के बारे में जाना उम्मीद करता हूँ आपको ये पोस्ट ज़रूरअच्छी लगी होगी। अगर ये पोस्टआपको अच्छी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ निचे दिए गए Social Media handle button से ज़रूर share करे।
                            दोस्तों हमारे द्वारा दी गयी पोस्ट में हमसे कोई भी कमी हुई हो तो निचे दिए गए Comment Box में हमे Comment करके ज़रूर बताये धन्यवाद।